Verses on the Recognition of the Lord· 7.5 / 14

Verses on the Recognition of the Lord7.5

7.5
स्मृतौ यैव स्वसंवित्तिः प्रमाणं स्वात्मसंभवे पूर्वानुभवसद्भावे साधनं सैव नापरम् ॥५॥
smṛtau yaiva svasaṃvittiḥ pramāṇaṃ svātmasaṃbhave pūrvānubhavasadbhāve sādhanaṃ saiva nāparam
— स्मृति में ; — जो ही ; — स्वसंवित्ति — आत्म-संवेदन ; — प्रमाण ; — अपने उत्पन्न होने के विषय में ; — पूर्व अनुभव की सत्ता के विषय में ; — साधन — सिद्ध करने का उपाय ; — वही ; — कोई अन्य नहीं

स्मृति में जो स्वसंवित्ति अपने उत्पन्न होने में प्रमाण है, वही पूर्व अनुभव की सत्ता को सिद्ध करने का साधन भी है — वही, और कोई अन्य नहीं।