Verses on the Recognition of the Lord· 7.6 / 14

Verses on the Recognition of the Lord7.6

7.6
बाध्यबाधकभावो ऽपि स्वात्मनिष्ठाविरोधिनाम् ज्ञानानाम् उदियाद् एकप्रमातृपरिनिष्ठितेः ॥६॥
bādhyabādhakabhāvo 'pi svātmaniṣṭhāvirodhinām jñānānām udiyād ekapramātṛpariniṣṭhiteḥ
— बाध्य-बाधक-भाव — खण्डनीय और खण्डक का सम्बन्ध ; — भी ; — अपने में निष्ठ होने से (अन्यथा) परस्पर अविरोधी (ज्ञानों) का ; — ज्ञानों का ; — उत्पन्न हो (विधि, √इ+उद्) ; — एक प्रमाता में पूर्ण प्रतिष्ठा के कारण

बाध्य-बाधक-भाव भी, जो ज्ञान अपने-अपने में निष्ठ होने के कारण (अन्यथा) परस्पर अविरोधी हैं, उनमें केवल इसलिए उत्पन्न हो सकता है क्योंकि वे एक प्रमाता में पूर्णतः प्रतिष्ठित हैं।