— (आत्मा के) होने पर, स्वीकार होने पर (√अस्, अधिकरण कृदन्त); — भी; — आत्मा (के होने पर); — दृक् (ज्ञान) के नष्ट होने के कारण; — उसके (ज्ञान के) द्वारा; — पूर्वदृष्ट वस्तुओं के विषय में; — स्मृति; — किससे? किस साधन से?; — और, फिर; — ठीक जिस (प्रमाता) में; — अनुभव (हुआ); — उसी पद (प्रमाता) में होने वाली; — वह (स्मृति)
(आक्षेप:) किन्तु आत्मा को स्वीकार कर लेने पर भी, चूँकि (जिस ज्ञान के द्वारा वस्तुएँ देखी गई थीं वह) दृष्टि नष्ट हो गई, तो उसके द्वारा पूर्वदृष्ट वस्तुओं विषयक स्मृति किससे होगी? और वह स्मृति तो ठीक उसी (प्रमाता) में होती है जिसमें अनुभव हुआ था।