Home trika Verses on the Recognition of the Lord 15.6 Verses on the Recognition of the Lord15.6
सत्तानन्दः क्रिया पत्युस् तदभावो ऽपि सा पशोह्
द्वयात्मा तद् रजो दुःखं श्लेषि सत्त्वतमोमयम् ॥६॥
sattānandaḥ kriyā patyus tadabhāvo 'pi sā paśoh
dvayātmā tad rajo duḥkhaṃ śleṣi sattvatamomayam
sattānandaḥ — सत्ता का आनन्द (सत्त्व, आनन्द-रूप) ; kriyā — क्रिया ; patyuḥ — पति (ईश्वर) की ; tadabhāvaḥ — उस (आनन्द) का अभाव (अनानन्द) ; api — भी ; sā — वही (क्रिया) ; paśoḥ — पशु (बद्ध जीव) की ; dvayātmā — द्वि-स्वरूप (सुख-दुःख रूप) ; tat — वह ; rajaḥ — रजस् ; duḥkham — दुःख-रूप ; śleṣi — श्लेषकारी, (दोनों को) जोड़ने वाला ; sattvatamomayam — सत्त्व और तमस्-मय (को बाँधने वाला) सत्ता का आनन्द पति (ईश्वर) की क्रिया है; उसका अभाव भी पशु के लिए वही (क्रिया), अब द्वि-स्वरूप (सुख-दुःख रूप) होकर, रजस् है — वह श्लेषकारी (जोड़ने वाला), दुःख-रूप (रजस्), जो सत्त्व और तमस् को (परस्पर बाँधता है)।
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