ये ऽप्य् असामयिकेदन्तापरामर्शभुवः प्रभोः
ते विमिश्रा विभिन्नाश् च तथा चित्रावभासिनः ॥७॥
ye 'py asāmayikedantā-parāmarśabhuvaḥ prabhoḥ
te vimiśrā vibhinnāś ca tathā citrāvabhāsinaḥ
— जो; — भी; — असामयिक (अनौपचारिक) इदन्ता के परामर्श से उत्पन्न; — प्रभु के; — वे (भाव); — विमिश्र, मिले हुए; — विभिन्न, पृथक् (भूत कृदन्त); — और; — और इस प्रकार; — विचित्र (नाना रूप) प्रतीत होने वाले
और प्रभु के जो (वे भाव) असामयिक (अनौपचारिक) इदन्ता के परामर्श से उत्पन्न होते हैं — वे विमिश्र (मिले हुए) तथा विभिन्न (पृथक्) दोनों हैं, और इस प्रकार विचित्र (नाना रूप) प्रतीत होते हैं।