Verses on the Recognition of the Lord· 15.7 / 18

Verses on the Recognition of the Lord15.7

15.7
ये ऽप्य् असामयिकेदन्तापरामर्शभुवः प्रभोः ते विमिश्रा विभिन्नाश् च तथा चित्रावभासिनः ॥७॥
ye 'py asāmayikedantā-parāmarśabhuvaḥ prabhoḥ te vimiśrā vibhinnāś ca tathā citrāvabhāsinaḥ
— जो ; — भी ; — असामयिक (अनौपचारिक) इदन्ता के परामर्श से उत्पन्न ; — प्रभु के ; — वे (भाव) ; — विमिश्र, मिले हुए ; — विभिन्न, पृथक् (भूत कृदन्त) ; — और ; — और इस प्रकार ; — विचित्र (नाना रूप) प्रतीत होने वाले

और प्रभु के जो (वे भाव) असामयिक (अनौपचारिक) इदन्ता के परामर्श से उत्पन्न होते हैं — वे विमिश्र (मिले हुए) तथा विभिन्न (पृथक्) दोनों हैं, और इस प्रकार विचित्र (नाना रूप) प्रतीत होते हैं।