— मन-मात्र के पथ पर; — भी; — इन्द्रिय-विषयत्व रूप में (मानने से); — विभ्रम (भ्रम) के कारण; — स्पष्ट आभास वाली; — भावों की; — सृष्टि; — स्वप्न-पद (स्वप्न अवस्था); — मानी गई (भूत कृदन्त)
मन-मात्र के पथ पर भी, इन्द्रिय-विषयत्व रूप विभ्रम (भ्रम) के कारण, भावों की स्पष्ट आभास वाली जो सृष्टि (होती है), वह स्वप्न-पद (स्वप्न अवस्था) मानी गई है।