तावन् मात्रस्थितौ प्रोक्तं सौषुप्त[ं] प्रलयोपमम्
सवेद्यम् अपवेद्यं च मायामलयुतायुतम् ॥१५॥
tāvan mātrasthitau proktaṃ sauṣupta[ṃ] pralayopamam
savedyam apavedyaṃ ca māyāmalayutāyutam
— इतनी मात्र; — (शुद्ध प्रमाता रूप) मात्र की स्थिति में; — कहा गया (भूत कृदन्त); — सुषुप्ति (सौषुप्त अवस्था); — प्रलय के समान; — सवेद्य — विषय-सहित; — अपवेद्य — विषय-रहित; — और; — माया-मल से युक्त या अयुक्त
इतनी मात्र (शुद्ध प्रमाता) की स्थिति को प्रलय के समान सुषुप्ति कहा गया है — चाहे सवेद्य (विषय-सहित) हो या अपवेद्य (विषय-रहित), चाहे माया-मल से युक्त हो या अयुक्त।