— शून्य में; — जिसका स्वरूप बुद्धि आदि का अभाव है; — जो (मात्र) अहन्ता और कर्तृता का पद (स्थान) है; — जिसमें केवल अस्फुट और रूप-रहित संस्कार ही रहते हैं; — ज्ञेय की शून्यता
उस शून्य में — जिसका स्वरूप बुद्धि आदि का अभाव है, जो अहन्ता और कर्तृता का पद (स्थान) है, जिसमें केवल अस्फुट और रूप-रहित संस्कार ही रहते हैं — ज्ञेय की शून्यता (होती है)।