Verses on the Recognition of the Lord· 14.12 / 20

Verses on the Recognition of the Lord14.12

14.12
मुख्यत्वं कर्तृतायाश् च बोधस्य च चिदात्मनः शून्यादौ तद्गुणे ज्ञानं तत्समावेशलक्षणम् ॥१२॥
mukhyatvaṃ kartṛtāyāś ca bodhasya ca cidātmanaḥ śūnyādau tadguṇe jñānaṃ tatsamāveśalakṣaṇam
— मुख्यत्व — प्रधानता (का पुनः उदय) ; — कर्तृता की ; — और ; — बोध की ; — और ; — चित्-स्वरूप (का) ; — शून्य आदि में ; — जो उसका गुण (गौण रूप) बन गया था ; — (वह) ज्ञान ; — जिसका लक्षण उस (चैतन्य) में समावेश (तादात्म्य) है

कर्तृता तथा चित्-स्वरूप बोध की प्रधानता का — शून्य आदि में, जो उसका गुण (गौण रूप) बन गया था — (पुनः उदय) ही वह ज्ञान है, जिसका लक्षण उस (चैतन्य) में समावेश (तादात्म्य) है।