Verses on the Recognition of the Lord· 12.13 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.13

12.13
कार्यम् अव्यभिचार्यस्य लिङ्गम् अन्यप्रमातृगात् तदाभासस् तदाभासाद् एव त्व् अधिपतेः परः ॥१३॥
kāryam avyabhicāryasya liṅgam anyapramātṛgāt tadābhāsas tadābhāsād eva tv adhipateḥ paraḥ
— कार्य ; — अव्यभिचारी (कारण) का ; — लिंग — अनुमापक चिह्न ; — अन्य प्रमाता में स्थित ; — उस (कार्य) का आभास ; — उस (कारण) के आभास से ; — ही, केवल ; — किन्तु ; — अधिपति (ईश्वर) से ; — भिन्न, पर

कार्य अव्यभिचारी (कारण) का लिंग (अनुमापक चिह्न) है; उस कार्य का आभास, जो अन्य प्रमाता में स्थित है, उस कारण के आभास से ही उत्पन्न होता है — किन्तु (अन्ततः) वह अधिपति (ईश्वर) से ही भिन्न है।