Verses on the Recognition of the Lord· 12.10 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.10

12.10
योगिनाम् अपि मृद्बीजे विनैवेच्छावशेन तत् घटादि जायते तत्तत्स्थिरस्वार्थक्रियाकरम् ॥१०॥
yoginām api mṛdbīje vinaivecchāvaśena tat ghaṭādi jāyate tattatsthirasvārthakriyākaram
— योगियों के लिए ; — भी ; — मिट्टी और बीज (द्विवचन) ; — बिना ही ; — इच्छा के वश से ; — वह ; — घट आदि ; — उत्पन्न होता है (√जन्, आत्मनेपद) ; — उस-उस स्थिर तथा प्रभावी (अर्थक्रिया करने वाला) कार्य करने वाला

योगियों के लिए भी, इच्छा के वश से ही, बिना मिट्टी या बीज के, वह घट आदि उत्पन्न हो जाता है, जो उस-उस स्थिर तथा प्रभावी (अर्थक्रिया करने वाला) कार्य करता है।