Verses on the Recognition of the Lord· 12.9 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.9

12.9
तथा हि कुम्भकारो ऽसाव् ऐश्वर्यैव व्यवस्थया तत्तन्मृदादिसंस्कारक्रमेण जनयेद् घटम् ॥९॥
tathā hi kumbhakāro 'sāv aiśvaryaiva vyavasthayā tattanmṛdādisaṃskārakrameṇa janayed ghaṭam
— क्योंकि, इस प्रकार ; — कुम्भकार (कुम्हार) ; — वह (कुम्हार) ; — ऐश्वर्य (ईश्वर की सामर्थ्य) से ही ; — व्यवस्था (नियमन) से ; — उस-उस मृत्तिका आदि के संस्कार के क्रम से ; — उत्पन्न करे (विधि, प्रेरणार्थक, √जन्) ; — घट को

क्योंकि वह कुम्भकार (कुम्हार) भी ईश्वर के ऐश्वर्य की ही व्यवस्था से, उस-उस मृत्तिका आदि के संस्कार के क्रम से घट को उत्पन्न करता है।