तथा हि कुम्भकारो ऽसाव् ऐश्वर्यैव व्यवस्थया
तत्तन्मृदादिसंस्कारक्रमेण जनयेद् घटम् ॥९॥
tathā hi kumbhakāro 'sāv aiśvaryaiva vyavasthayā
tattanmṛdādisaṃskārakrameṇa janayed ghaṭam
— क्योंकि, इस प्रकार; — कुम्भकार (कुम्हार); — वह (कुम्हार); — ऐश्वर्य (ईश्वर की सामर्थ्य) से ही; — व्यवस्था (नियमन) से; — उस-उस मृत्तिका आदि के संस्कार के क्रम से; — उत्पन्न करे (विधि, प्रेरणार्थक, √जन्); — घट को
क्योंकि वह कुम्भकार (कुम्हार) भी ईश्वर के ऐश्वर्य की ही व्यवस्था से, उस-उस मृत्तिका आदि के संस्कार के क्रम से घट को उत्पन्न करता है।