Verses on the Recognition of the Lord· 11.16 / 17

Verses on the Recognition of the Lord11.16

11.16
प्रमातरि पुराणे तु सर्वदा भातविग्रहे किं प्रमाणं नवाभासः सर्वप्रमितिभागिनि ॥१६॥
pramātari purāṇe tu sarvadā bhātavigrahe kiṃ pramāṇaṃ navābhāsaḥ sarvapramitibhāgini
— प्रमाता के विषय में ; — पुरातन, आदि-सिद्ध ; — किन्तु ; — सदा ; — जिसका विग्रह (स्वरूप) सदा प्रकाशित है ; — क्या? ; — प्रमाण ; — नया आभास ; — जो प्रत्येक प्रमिति (ज्ञान) का भागी है

— किन्तु जो प्रमाता पुरातन (आदि-सिद्ध) है, जिसका स्वरूप सदा प्रकाशित है, जो प्रत्येक प्रमिति (ज्ञान) का भागी है — उसको (सिद्ध करने में) कौन-सा नया आभास प्रमाण बन सकता है?