pramātari purāṇe tu sarvadā bhātavigrahe
kiṃ pramāṇaṃ navābhāsaḥ sarvapramitibhāgini
— प्रमाता के विषय में; — पुरातन, आदि-सिद्ध; — किन्तु; — सदा; — जिसका विग्रह (स्वरूप) सदा प्रकाशित है; — क्या?; — प्रमाण; — नया आभास; — जो प्रत्येक प्रमिति (ज्ञान) का भागी है
— किन्तु जो प्रमाता पुरातन (आदि-सिद्ध) है, जिसका स्वरूप सदा प्रकाशित है, जो प्रत्येक प्रमिति (ज्ञान) का भागी है — उसको (सिद्ध करने में) कौन-सा नया आभास प्रमाण बन सकता है?