— विश्व की विचित्रता रूपी चित्र के (लिए); — समतल भित्ति-तल के समान; — विरुद्ध या अभाव के स्पर्श से रहित; — परमार्थतः सत् (वास्तविक रूप से विद्यमान); — ईश्वर में
जब ईश्वर — परमार्थतः सत् (वास्तविक), किसी विरुद्ध अथवा अभाव के स्पर्श से रहित, विश्व की विचित्रता रूपी चित्र के लिए समतल भित्ति के समान —