Verses on the Recognition of the Lord· 11.14 / 17

Verses on the Recognition of the Lord11.14

11.14
गुणैः शब्दादिभिर् भेदो जात्यादिभिर् अभिन्नता भावानाम् इत्थम् एकत्र प्रमातर्य् उपपद्यते ॥१४॥
guṇaiḥ śabdādibhir bhedo jātyādibhir abhinnatā bhāvānām ittham ekatra pramātary upapadyate
— गुणों से ; — शब्द आदि से ; — भेद ; — जाति आदि से ; — अभिन्नता, अभेद ; — भावों की ; — इस प्रकार ; — एक (में) ; — प्रमाता में ; — सिद्ध होते हैं, युक्त होते हैं (√पद्+उप, आत्मनेपद)

इस प्रकार भावों का भेद — शब्द आदि गुणों से — तथा उनका अभेद — जाति आदि से — दोनों एक ही प्रमाता में सिद्ध होते हैं।