— अपने-अपने स्वरूप में निष्ठ; — विविक्त (पृथक्) प्रतीत होने वाले; — भाव; — एक प्रमाता में; — परस्पर अन्वय रूप एकता से युक्त; — सम्बन्ध-ज्ञान का पद (आधार)
अपने-अपने स्वरूप में निष्ठ तथा विविक्त (पृथक्) प्रतीत होने वाले भाव, एक प्रमाता में परस्पर अन्वय रूप एकता से युक्त होकर, सम्बन्ध-ज्ञान का पद (आधार) बनते हैं।