Verses on the Recognition of the Lord· 10.3 / 7

Verses on the Recognition of the Lord10.3

10.3
तद्द्वयालम्बना एता मनो ऽनुव्यवसायि सत् करोति मातृव्यापारमयीः कर्मादिकल्पनाः ॥३॥
taddvayālambanā etā mano 'nuvyavasāyi sat karoti mātṛvyāpāramayīḥ karmādikalpanāḥ
— उन दोनों (एक-अनेक) का आलम्बन लेने वाले ; — ये ; — मन ; — अनुव्यवसाय (अनुगामी निश्चय) करने वाला ; — होता हुआ (√अस्, वर्तमान कृदन्त) ; — करता है (√कृ) ; — प्रमाता के व्यापार-मय ; — कर्म आदि (कारक) की कल्पनाएँ

उन दोनों (एक और अनेक) का आलम्बन लेने वाले ये (ज्ञान), तथा अनुव्यवसाय (अनुगामी निश्चय) करने वाला मन — प्रमाता के व्यापार से युक्त कर्म आदि की कल्पनाओं (कारक-निरूपणों) को रचता है।