tatraikam āntaraṃ tattvaṃ tad evendriyavedyatām
saṃprāpyānekatāṃ yāti deśakālasvabhāvataḥ
— इनमें, उस विषय में; — एक; — आन्तरिक; — तत्त्व; — वही; — इन्द्रिय-वेद्यता को; — प्राप्त करके (पूर्वकालिक क्रिया, √आप्+सम्-प्र); — अनेकता को; — जाता है, प्राप्त होता है (√या); — देश और काल के स्वभाव से
इनमें एक आन्तरिक तत्त्व ही, वही, इन्द्रिय-वेद्यता को प्राप्त होकर, देश और काल के स्वभाव से अनेकता को प्राप्त हो जाता है।