Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.19 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.19

6.19
यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते । निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा ॥ ६-१९ ॥
yadā viniyataṃ cittamātmanyevāvatiṣṭhate | niḥspṛhaḥ sarvakāmebhyo yukta ityucyate tadā || 6-19 ||
— जब संयत किया चित्त ; — आत्मा में ही स्थिर हो जाता है ; — समस्त कामनाओं से स्पृहारहित ; — तब वह युक्त कहलाता है

जब संयत किया हुआ चित्त आत्मा में ही स्थिर हो जाता है, और समस्त कामनाओं से स्पृहारहित हो जाता है, तब वह युक्त कहलाता है।