Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.20 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.20

6.20
यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता । योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनि ॥ ६-२० ॥
yathā dīpo nivātastho neṅgate sopamā smṛtā | yogino yatacittasya yuñjato yogamātmani || 6-20 ||
— जैसे वायुरहित स्थान का दीपक ; — नहीं हिलता — यही उपमा कही गई ; — संयतचित्त योगी की ; — आत्मा में योग का अभ्यास करते हुए

जैसे वायुरहित स्थान में स्थित दीपक नहीं हिलता — आत्मा में योग का अभ्यास करने वाले संयतचित्त योगी के लिए यही उपमा कही गई है।