यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता ।
योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनि ॥
६-२० ॥
yathā dīpo nivātastho neṅgate sopamā smṛtā |
yogino yatacittasya yuñjato yogamātmani ||
6-20 ||
जैसे वायुरहित स्थान में स्थित दीपक नहीं हिलता — आत्मा में योग का अभ्यास करने वाले संयतचित्त योगी के लिए यही उपमा कही गई है।