धूमेनाव्रियते वह्निर्यथाऽऽदर्शो मलेन च ।
यथोल्वेनावृतो गर्भस्तथा नेनायमावृतः ॥
३-४३ ॥
dhūmenāvriyate vahniryathā''darśo malena ca |
yatholvenāvṛto garbhastathā nenāyamāvṛtaḥ ||
3-43 ||
जैसे अग्नि धुएँ से, दर्पण मैल से, और गर्भ झिल्ली से ढका रहता है, वैसे ही यह (ज्ञान) उससे (काम से) ढका रहता है।