Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.43 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.43

3.43
धूमेनाव्रियते वह्निर्यथाऽऽदर्शो मलेन च । यथोल्वेनावृतो गर्भस्तथा नेनायमावृतः ॥ ३-४३ ॥
dhūmenāvriyate vahniryathā''darśo malena ca | yatholvenāvṛto garbhastathā nenāyamāvṛtaḥ || 3-43 ||
— धुएँ से अग्नि ढकी रहती है जैसे ; — जैसे दर्पण मैल से ; — जैसे झिल्ली से ढका गर्भ ; — वैसे ही यह उससे ढका रहता है

जैसे अग्नि धुएँ से, दर्पण मैल से, और गर्भ झिल्ली से ढका रहता है, वैसे ही यह (ज्ञान) उससे (काम से) ढका रहता है।