Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.36
अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुषः ।
अनिच्छमनोऽपि बलादाक्रम्येव नियोजितः ॥
३-३६ ॥
atha kena prayukto'yaṃ pāpaṃ carati pūruṣaḥ |
anicchamano'pi balādākramyeva niyojitaḥ ||
3-36 ||
— तब किससे प्रेरित होकर यह ; — पाप का आचरण करता है पुरुष ; — न चाहता हुआ भी बलपूर्वक ; — मानो आक्रमण कर नियुक्त किया हुआ तब हे वार्ष्णेय, न चाहता हुआ भी मनुष्य किससे प्रेरित होकर, मानो बलपूर्वक नियुक्त किया हुआ-सा, पाप का आचरण करता है?