Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.37 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.37

3.37
काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः । महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम् ॥ ३-३७ ॥
kāma eṣa krodha eṣa rajoguṇasamudbhavaḥ | mahāśano mahāpāpmā viddhyenamiha vairiṇam || 3-37 ||
— यह काम है, यह क्रोध है ; — रजोगुण से उत्पन्न ; — महाभोजी, महापापी ; — इसे यहाँ शत्रु जान

यह काम है, यह क्रोध है, जो रजोगुण से उत्पन्न होता है; यह महाभोजी और महापापी है — इसे ही यहाँ शत्रु जानो।