Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.46 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.46

2.46
त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन । निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान् ॥ २-४६ ॥
traiguṇyaviṣayā vedā nistraiguṇyo bhavārjuna | nirdvandvo nityasattvastho niryogakṣema ātmavān || 2-46 ||
— वेद तीनों गुणों के विषय वाले हैं ; — त्रिगुणातीत हो जा, अर्जुन ; — द्वन्द्वों से रहित, नित्य सत्त्व में स्थित ; — योग-क्षेम से मुक्त, आत्मवान्

हे अर्जुन, वेद तीनों गुणों के विषय वाले हैं; तुम त्रिगुणातीत हो जाओ, द्वन्द्वों से रहित, नित्य सत्त्व में स्थित, योग-क्षेम की चिन्ता से मुक्त और आत्मवान् बनो।