त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन ।
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान् ॥
२-४६ ॥
traiguṇyaviṣayā vedā nistraiguṇyo bhavārjuna |
nirdvandvo nityasattvastho niryogakṣema ātmavān ||
2-46 ||
हे अर्जुन, वेद तीनों गुणों के विषय वाले हैं; तुम त्रिगुणातीत हो जाओ, द्वन्द्वों से रहित, नित्य सत्त्व में स्थित, योग-क्षेम की चिन्ता से मुक्त और आत्मवान् बनो।