Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.44 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.44

2.44
कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलेप्सवः । क्रियाविशेषबहुला भोगैश्वर्यगतीः प्रति ॥ २-४४ ॥
kāmātmānaḥ svargaparā janmakarmaphalepsavaḥ | kriyāviśeṣabahulā bhogaiśvaryagatīḥ prati || 2-44 ||
— कामनापूर्ण ; — स्वर्ग को परम मानने वाले ; — जन्म-कर्म के फल के इच्छुक ; — अनेक विशेष क्रियाओं से भरी ; — भोग और ऐश्वर्य की प्राप्ति की ओर

— कामनापूर्ण, स्वर्ग को परम मानने वाले, जन्म-कर्म के फल की इच्छा रखने वाले, भोग और ऐश्वर्य की प्राप्ति की ओर ले जाने वाली अनेक विशेष क्रियाओं से भरी हुई।