Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.35
अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम् ।
सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते ॥
२-३५ ॥
akīrtiṃ cāpi bhūtāni kathayiṣyanti te'vyayām |
sambhāvitasya cākīrtirmaraṇādatiricyate ||
2-35 ||
— और भूत (लोग) तेरी अपकीर्ति को ; — अक्षय रूप में कहेंगे ; — और सम्मानित पुरुष के लिए अपकीर्ति ; — मरण से भी बढ़कर है और सब लोग तुम्हारी अक्षय अपकीर्ति का बखान करेंगे; और सम्मानित पुरुष के लिए अपकीर्ति मरण से भी बढ़कर है।