Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.34 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.34

2.34
अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि । ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि ॥ २-३४ ॥
atha cettvamimaṃ dharmyaṃ saṃgrāmaṃ na kariṣyasi | tataḥ svadharmaṃ kīrtiṃ ca hitvā pāpamavāpsyasi || 2-34 ||
— और यदि तू इस धर्म-युक्त संग्राम को ; — नहीं करेगा ; — तो अपने धर्म और कीर्ति को खोकर ; — पाप को प्राप्त होगा

और यदि तुम इस धर्म-युक्त संग्राम को नहीं करोगे, तो अपने धर्म और कीर्ति को खोकर पाप को प्राप्त होगे।