Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.12 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.12

2.12
अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञवन्नाभिभाषसे । गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः ॥ २-१२ ॥
aśocyānanvaśocastvaṃ prajñavannābhibhāṣase | gatāsūnagatāsūṃśca nānuśocanti paṇḍitāḥ || 2-12 ||
— तुम उनके लिए शोक करते हो जो शोक के योग्य नहीं ; — फिर भी ज्ञानियों-सा बोलते हो ; — मृतकों और जीवितों के लिए ; — पण्डित जन शोक नहीं करते

तुम उनके लिए शोक करते हो जो शोक के योग्य नहीं हैं, फिर भी ज्ञानियों के से वचन बोलते हो; किन्तु पण्डित जन न मृतकों के लिए शोक करते हैं, न जीवितों के लिए।