अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञवन्नाभिभाषसे ।
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः ॥
२-१२ ॥
aśocyānanvaśocastvaṃ prajñavannābhibhāṣase |
gatāsūnagatāsūṃśca nānuśocanti paṇḍitāḥ ||
2-12 ||
तुम उनके लिए शोक करते हो जो शोक के योग्य नहीं हैं, फिर भी ज्ञानियों के से वचन बोलते हो; किन्तु पण्डित जन न मृतकों के लिए शोक करते हैं, न जीवितों के लिए।