Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.13
नह्येवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः ।
न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमितः परम् ॥
२-१३ ॥
nahyevāhaṃ jātu nāsaṃ na tvaṃ neme janādhipāḥ |
na caiva na bhaviṣyāmaḥ sarve vayamitaḥ param ||
2-13 ||
— ऐसा कभी नहीं था कि मैं न रहा होऊँ ; — न तुम, न ये राजागण ; — और न ऐसा होगा कि हम न रहें ; — हम सब इसके आगे ऐसा कभी नहीं था कि मैं न रहा होऊँ, न तुम, न ये राजागण; और न ऐसा होगा कि इसके आगे हम सब न रहें।