Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.13 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.13

2.13
नह्येवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः । न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमितः परम् ॥ २-१३ ॥
nahyevāhaṃ jātu nāsaṃ na tvaṃ neme janādhipāḥ | na caiva na bhaviṣyāmaḥ sarve vayamitaḥ param || 2-13 ||
— ऐसा कभी नहीं था कि मैं न रहा होऊँ ; — न तुम, न ये राजागण ; — और न ऐसा होगा कि हम न रहें ; — हम सब इसके आगे

ऐसा कभी नहीं था कि मैं न रहा होऊँ, न तुम, न ये राजागण; और न ऐसा होगा कि इसके आगे हम सब न रहें।