Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 17.20 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)17.20

17.20
दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे । देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम् ॥ १७-२० ॥
dātavyamiti yaddānaṃ dīyate'nupakāriṇe | deśe kāle ca pātre ca taddānaṃ sāttvikaṃ smṛtam || 17-20 ||
— 'देना कर्तव्य है' ऐसा जो दान ; — उपकार न करने वाले को दिया जाता है ; — उचित देश, काल और पात्र में ; — वह दान सात्त्विक माना गया

'देना कर्तव्य है' ऐसा (मानकर) जो दान उपकार न करने वाले को, उचित देश, काल और पात्र में दिया जाता है — वह दान सात्त्विक माना गया है।