Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 17.19 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)17.19

17.19
मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः । परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम् ॥ १७-१९ ॥
mūḍhagrāheṇātmano yatpīḍayā kriyate tapaḥ | parasyotsādanārthaṃ vā tattāmasamudāhṛtam || 17-19 ||
— मूढ़तापूर्ण धारणा से, अपने को पीड़ा देकर जो ; — तप किया जाता है ; — अथवा दूसरे के विनाश के लिए ; — वह तामस कहा गया

जो तप मूढ़तापूर्ण धारणा से अपने को पीड़ा देकर, अथवा दूसरे के विनाश के लिए किया जाता है — वह तामस कहा गया है।