Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.10 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.10

16.10
काममाश्रित्य दुष्पूरं दम्भमानमदान्विताः । असद्ग्रहाश्ताः (-श्तिः) क्रूराः प्रचरन्त्यशुचिव्रताः ॥ १६-१० ॥
kāmamāśritya duṣpūraṃ dambhamānamadānvitāḥ | asadgrahāśtāḥ (-śtiḥ) krūrāḥ pracarantyaśucivratāḥ || 16-10 ||
— दुष्पूर काम का आश्रय लेकर ; — दम्भ, मान, मद से युक्त ; — असत् ग्रह वाले, क्रूर ; — अपवित्र व्रतों वाले विचरते हैं

दुष्पूर (न भरने वाले) काम का आश्रय लेकर, दम्भ, मान और मद से युक्त, असत् ग्रह (मिथ्या धारणा) वाले, क्रूर, वे अपवित्र व्रतों वाले होकर विचरते हैं।