Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.9 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.9

16.9
एतां दृष्टिमवष्टभ्य नष्टात्मानोऽल्पबुद्धयः । प्रभवन्त्युग्रकर्माणः क्षयाय जगतोऽशुभाः ॥ १६-९ ॥
etāṃ dṛṣṭimavaṣṭabhya naṣṭātmāno'lpabuddhayaḥ | prabhavantyugrakarmāṇaḥ kṣayāya jagato'śubhāḥ || 16-9 ||
— इस दृष्टि का आश्रय लेकर ; — नष्ट आत्मा वाले, अल्पबुद्धि ; — उग्रकर्मा उत्पन्न होते हैं ; — जगत् के विनाश के लिए, अशुभ

इस दृष्टि का आश्रय लेकर, नष्ट आत्मा वाले, अल्पबुद्धि, उग्रकर्मा, अशुभ लोग जगत् के विनाश के लिए उत्पन्न होते हैं।