Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.11 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.11

16.11
चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिताः । कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिताः ॥ १६-११ ॥
cintāmaparimeyāṃ ca pralayāntāmupāśritāḥ | kāmopabhogaparamā etāvaditi niścitāḥ || 16-11 ||
— और अपरिमित चिन्ता ; — मृत्यु तक रहने वाली, उसमें लगे ; — काम के उपभोग को परम मानने वाले ; — 'बस इतना ही है' ऐसा निश्चय किए

मृत्यु तक रहने वाली अपरिमित चिन्ता में लगे हुए, काम के उपभोग को परम मानने वाले, 'बस इतना ही है' ऐसा निश्चय किए हुए —