Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.12 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.12

16.12
आशापाशशतैर्बद्धाः कामक्रोधपरायणाः । ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्चयान् ॥ १६-१२ ॥
āśāpāśaśatairbaddhāḥ kāmakrodhaparāyaṇāḥ | īhante kāmabhogārthamanyāyenārthasañcayān || 16-12 ||
— आशा के सैकड़ों पाशों से बँधे ; — काम-क्रोध के परायण ; — काम-भोग के लिए चेष्टा करते हैं ; — अन्याय से धन-संचय की

आशा के सैकड़ों पाशों से बँधे, काम और क्रोध के परायण, वे काम-भोग के लिए अन्याय से धन-संचय की चेष्टा करते हैं।