Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.13 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.13

16.13
इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम् । इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम् ॥ १६-१३ ॥
idamadya mayā labdhamimaṃ prāpsye manoratham | idamastīdamapi me bhaviṣyati punardhanam || 16-13 ||
— यह आज मैंने पाया ; — इस मनोरथ को मैं प्राप्त करूँगा ; — यह मेरा है, और यह भी मेरा ; — फिर धन मेरा हो जाएगा

'यह आज मैंने पाया, इस मनोरथ को मैं प्राप्त करूँगा; यह मेरा है, और यह धन भी फिर मेरा हो जाएगा।'