Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.56 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.56

11.56
दृष्ट्वेदं मानुषं रूपं तवसौम्यं जनार्दन । इदानीमस्मि संवृत्तः सचेताः प्रकृतिं गतः ॥ ११-५६ ॥
dṛṣṭvedaṃ mānuṣaṃ rūpaṃ tavasaumyaṃ janārdana | idānīmasmi saṃvṛttaḥ sacetāḥ prakṛtiṃ gataḥ || 11-56 ||
— आपके इस मनुष्य-रूप को देखकर ; — सौम्य, हे जनार्दन ; — अब मैं स्वस्थ हो गया, सचेत ; — प्रकृति (सामान्य अवस्था) को प्राप्त

हे जनार्दन, आपके इस सौम्य मनुष्य-रूप को देखकर अब मैं स्वस्थ हो गया हूँ, सचेत होकर अपनी प्रकृति (सामान्य अवस्था) को प्राप्त हो गया हूँ।