Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.55 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.55

11.55
इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः । आश्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा ॥ ११-५५ ॥
ityarjunaṃ vāsudevastathoktvā svakaṃ rūpaṃ darśayāmāsa bhūyaḥ | āśvāsayāmāsa ca bhītamenaṃ bhūtvā punaḥ saumyavapurmahātmā || 11-55 ||
— अर्जुन से इस प्रकार कहकर वासुदेव ; — अपना (पूर्व) रूप फिर दिखाया ; — और इस भयभीत को आश्वासन दिया ; — फिर सौम्य शरीर वाले होकर, महात्मा

अर्जुन से इस प्रकार कहकर वासुदेव ने फिर अपना (पूर्व) रूप दिखाया, और महात्मा ने फिर से सौम्य शरीर वाले होकर उस भयभीत को आश्वासन दिया।