मा ते व्यथा मा च विमूढत भूद् दृष्ट्वा रूपं घोरमुग्रं ममेदम् ।
व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वं तदेव मे रूपमिदं प्रपश्य ॥
११-५४ ॥
mā te vyathā mā ca vimūḍhata bhūd dṛṣṭvā rūpaṃ ghoramugraṃ mamedam |
vyapetabhīḥ prītamanāḥ punastvaṃ tadeva me rūpamidaṃ prapaśya ||
11-54 ||
मेरे इस घोर और उग्र रूप को देखकर तुझे न व्यथा हो और न मूढ़ता हो; भयरहित और प्रसन्न मन वाला होकर तू फिर मेरे इसी (पूर्व) रूप को देख।