Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.38 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.38

11.38
कस्माच्चैते न नमेयुर्महात्मन् गरीयसे ब्रह्मणोऽप्यादिकर्त्रे । अनन्त देवेश जगन्निवास त्वमक्षरं सदसत्तत्परं यत् ॥ ११-३८ ॥
kasmāccaite na nameyurmahātman garīyase brahmaṇo'pyādikartre | ananta deveśa jagannivāsa tvamakṣaraṃ sadasattatparaṃ yat || 11-38 ||
— और ये क्यों न नमस्कार करें, हे महात्मन् ; — ब्रह्मा से भी श्रेष्ठ, आदिकर्ता को ; — हे अनन्त, हे देवेश, हे जगन्निवास ; — आप अक्षर, सत्-असत्, और जो उससे परे

हे महात्मन्, ये आपको, जो ब्रह्मा से भी श्रेष्ठ और आदिकर्ता हैं, क्यों न नमस्कार करें? हे अनन्त, हे देवेश, हे जगन्निवास, आप अक्षर हैं, सत् और असत् हैं, और जो उससे परे है वह भी।