Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.39 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.39

11.39
त्वमादिदेवः पुरुषः पुराण स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् । वेत्ताऽसि वेद्यं च परं च धाम त्वया ततं विश्वमनन्तरूपम् ॥ ११-३९ ॥
tvamādidevaḥ puruṣaḥ purāṇa stvamasya viśvasya paraṃ nidhānam | vettā'si vedyaṃ ca paraṃ ca dhāma tvayā tataṃ viśvamanantarūpam || 11-39 ||
— आप आदिदेव, पुरातन पुरुष ; — आप इस विश्व के परम निधान ; — आप ज्ञाता और ज्ञेय, और परम धाम ; — आपसे यह विश्व व्याप्त, हे अनन्तरूप

आप आदिदेव, पुरातन पुरुष हैं; आप इस विश्व के परम निधान हैं; आप ज्ञाता हैं और ज्ञेय भी, तथा परम धाम भी; हे अनन्तरूप, आपसे यह विश्व व्याप्त है।