Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.17 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.17

11.17
किरीटिनं गदिनं चक्रिणं च तेजोराशिं सर्वतो दीप्तिमन्तम् । पश्यामि त्वां दुर्निरीक्षं समन्ता द्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम् ॥ ११-१७ ॥
kirīṭinaṃ gadinaṃ cakriṇaṃ ca tejorāśiṃ sarvato dīptimantam | paśyāmi tvāṃ durnirīkṣaṃ samantā ddīptānalārkadyutimaprameyam || 11-17 ||
— मुकुट, गदा और चक्र वाले ; — तेज की राशि, सब ओर देदीप्यमान ; — मैं आपको देखता हूँ, दुर्निरीक्ष, सब ओर ; — प्रज्वलित अग्नि-सूर्य की द्युति वाले, अप्रमेय

मुकुट वाले, गदा वाले, चक्र वाले, तेज की राशि, सब ओर देदीप्यमान आपको मैं देखता हूँ — जिसे देखना कठिन है, सब ओर प्रज्वलित अग्नि और सूर्य की द्युति वाले, अप्रमेय।