तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः ।
नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता ॥
१०-११ ॥
teṣāmevānukampārthamahamajñānajaṃ tamaḥ |
nāśayāmyātmabhāvastho jñānadīpena bhāsvatā ||
10-11 ||
उन पर ही अनुकम्पा के लिए, उनके आत्म-भाव (अन्तःकरण) में स्थित होकर, मैं अज्ञान से उत्पन्न अन्धकार को ज्ञान के देदीप्यमान दीपक से नष्ट कर देता हूँ।