Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 10.12 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)10.12

10.12
परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान् । पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम् ॥ १०-१२ ॥
paraṃ brahma paraṃ dhāma pavitraṃ paramaṃ bhavān | puruṣaṃ śāśvataṃ divyamādidevamajaṃ vibhum || 10-12 ||
— परम ब्रह्म, परम धाम ; — परम पवित्र आप ; — शाश्वत, दिव्य पुरुष ; — आदिदेव, अज, विभु

आप परम ब्रह्म, परम धाम और परम पवित्र हैं; आप शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अज और विभु हैं —