Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.35 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.35

1.35
मातुलाः श्वशुराः पौत्राः स्यालाः सम्बन्धिनस्तथा । एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन ! ॥ १-३५ ॥
mātulāḥ śvaśurāḥ pautrāḥ syālāḥ sambandhinastathā | etānna hantumicchāmi ghnato'pi madhusūdana ! || 1-35 ||
— मामा, श्वशुर, पौत्र ; — साले और सम्बन्धी भी ; — इन्हें मैं मारना नहीं चाहता ; — चाहे वे मुझे मार डालें ; — हे मधुसूदन

मामा, श्वशुर, पौत्र, साले और अन्य सम्बन्धी भी। हे मधुसूदन, इन्हें मैं मारना नहीं चाहता, चाहे वे मुझे ही मार डालें,