Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.34 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.34

1.34
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च । आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः ॥ १-३४ ॥
ta ime'vasthitā yuddhe prāṇāṃstyaktvā dhanāni ca | ācāryāḥ pitaraḥ putrāstathaiva ca pitāmahāḥ || 1-34 ||
— वे ही ये युद्ध में खड़े हैं ; — प्राणों और धन को त्यागकर ; — आचार्य, पिता, पुत्र ; — और वैसे ही पितामह

वे ही ये अपने प्राणों और धन को त्यागकर युद्ध में खड़े हैं — आचार्य, पिता, पुत्र और पितामह भी,