Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.33 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.33

1.33
किं नो राज्येन गोविन्द ! किं भोगैर्जीवितेन वा । येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च ॥ १-३३ ॥
kiṃ no rājyena govinda ! kiṃ bhogairjīvitena vā | yeṣāmarthe kāṅkṣitaṃ no rājyaṃ bhogāḥ sukhāni ca || 1-33 ||
— हमें राज्य से क्या ; — हे गोविन्द ; — भोगों से या जीवन से क्या ; — जिनके लिए ; — हम राज्य, भोग और सुख चाहते हैं

हे गोविन्द, हमें राज्य से क्या, भोगों या जीवन से भी क्या प्रयोजन — जब जिनके लिए हम राज्य, भोग और सुख चाहते हैं,