Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.36 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.36

1.36
निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन ! ॥ १-३६ ॥
nihatya dhārtarāṣṭrānnaḥ kā prītiḥ syājjanārdana ! || 1-36 ||
— धृतराष्ट्रपुत्रों को मारकर ; — हमें ; — क्या सुख होगा ; — हे जनार्दन

तीनों लोकों के राज्य के लिए भी नहीं, फिर इस पृथ्वी के लिए तो कहना ही क्या। हे जनार्दन, धृतराष्ट्रपुत्रों को मारकर हमें कौन-सा सुख होगा?