Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.29 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.29

1.29
दृष्ट्वेमान्स्वजनान्कृष्ण युयुत्सून्समुपस्थितान् । सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति ॥ १-२९ ॥
dṛṣṭvemānsvajanānkṛṣṇa yuyutsūnsamupasthitān | sīdanti mama gātrāṇi mukhaṃ ca pariśuṣyati || 1-29 ||
— इन स्वजनों को देखकर ; — हे कृष्ण ; — युद्ध की इच्छा से उपस्थित ; — मेरे अंग शिथिल हो रहे हैं ; — और मुख सूख रहा है

हे कृष्ण, युद्ध की इच्छा से उपस्थित इन अपने स्वजनों को देखकर मेरे अंग शिथिल हो रहे हैं और मुख सूख रहा है;