तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान् बन्धूनवस्थितान् ।
कृपया परयाविष्टो सीदमानोऽब्रवीदिदम् ॥
१-२८ ॥
tānsamīkṣya sa kaunteyaḥ sarvān bandhūnavasthitān |
kṛpayā parayāviṣṭo sīdamāno'bravīdidam ||
1-28 ||
अपने सामने खड़े उन समस्त बन्धुओं को देखकर वह कुन्तीपुत्र परम करुणा से अभिभूत होकर विषाद में डूबता हुआ यह बोला —