Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.28 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.28

1.28
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान् बन्धूनवस्थितान् । कृपया परयाविष्टो सीदमानोऽब्रवीदिदम् ॥ १-२८ ॥
tānsamīkṣya sa kaunteyaḥ sarvān bandhūnavasthitān | kṛpayā parayāviṣṭo sīdamāno'bravīdidam || 1-28 ||
— उन्हें देखकर ; — वह कुन्तीपुत्र ; — समस्त बन्धुओं को खड़ा हुआ ; — परम करुणा से अभिभूत ; — विषाद में डूबता हुआ यह बोला

अपने सामने खड़े उन समस्त बन्धुओं को देखकर वह कुन्तीपुत्र परम करुणा से अभिभूत होकर विषाद में डूबता हुआ यह बोला —